Sunday, May 24, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS

 अनादानमदत्त स्यास्तेयव्रतमुदीदितम्। 

बाह्याः प्राणा नृणामर्थो हरता तं हता ही ते।। 

अर्थात्, 

न दी गई वस्तु को न लेना अस्तेय विद्या(/चोरी न करने का नियम) कहा गया है। धन मनुष्यों का   बाहरी प्राण है। जिसने उन धन को ले लिया उसने उन प्राणों को ही हरण कर लिया ।

No comments:

Post a Comment

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS

 अनादानमदत्त स्यास्तेयव्रतमुदीदितम्।  बाह्याः प्राणा नृणामर्थो हरता तं हता ही ते।।  अर्थात्,  न दी गई वस्तु को न लेना अस्तेय विद्या(/चोरी न ...