Monday, February 2, 2026

सुभाषितम् (NOBLE THOUGHTS)

 युक्ताहार विहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।

युक्त स्वप्नाववोधस्य योगो भवति दुःखहा।।

अर्थात्,

           जो नियमित आहार विहार करता है, जो कार्य में नियत चेष्टा करता है, जिसका निद्रा और जागरण नियत हो, उसका दुःख निवारण कारक योग सिद्ध होता है।

Meaning --

     One who maintains proper diet and healthy lifestyle, who practices regularly in the work, whose sleep and wakefulness is in control, his trial of getting relieved from suffering would be a success.

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