Wednesday, May 6, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 न च शत्रुरवज्ञेयो दुर्बलोऽपि बलीयसा।

अल्पोऽपि हि दहत्यग्निर्विषमल्पं हिनस्ति च।।

अर्थात्,

  बलवान व्यक्ति को  शत्रु का उपेक्षा दुर्बल होने पर भी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि थोड़ी सी भी अग्नि जला देती है और थोड़ा-सा विष भी मार डालता है।

Meaning --

A powerful man should not ignore the enemies even the weak one. Because a little bit of fire also burns and even a small amount of poison kills.


Tuesday, May 5, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 अति सर्वनाश हेतुर्ह्यतोऽत्यन्तं विवर्जयेत्। 

अर्थात्, 

 अति सर्वनाश का कारण है। इसलिए अत्यधिक का परित्याग करना चाहिए। 

Meaning --

 Excess is the cause of destruction. Hence one should forbid it in every respect.

Monday, May 4, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 उच्चासनगतो नीचो नीचः एव न चोत्तमः।

प्रासादशिखरस्थोपि काकः न गरुडायते।।

अर्थात्,

   ऊँचे पद पर आसीन होने पर भी नीच नीच ही रहता है,उत्तम नहीं बन पाता। जैसे महल के शिखर पर बैठा हुआ कौवा कभी गरूड नहीं बनता है। 

Meaning --

  A despicable /mean person remains mean even though he holds a high position ; but can't be perfect. Just like the crow sitting on the top of the  palace cannot be a vulture .


Sunday, May 3, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 अक्रमेणानुपायेन कर्मारम्भो न सिध्यति।

अर्थात्,

विना क्रम के और विना युक्ति के शुरु किया गया काम सफल नहीं होता है।

Meaning --

  The work started without any arrangement and planning doesn't succeed. 

Friday, May 1, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS

 सुजनो न कुप्यत्येव अथ कुप्यति विप्रियं न चिन्तयति।

अथ चिन्तयति न जल्पति अथ जल्पति लज्जितो भवति।।

अर्थात्,

   सज्जन क्रोध नहीं करता है यदि कभी क्रोध करता है तब अनिष्ट नहीं सोचता है और यदि सोचता है तब अप्रिय नहीं बोलता है और यदि बोलता है तब लज्जित होता है।

Meaning --

A wise man doesn't get angry and if ever he would do so then he won't think about to blame. If he thinks to do so then he would not talk unpleasant. And if he tells so then he would be  ashamed. 

  

Thursday, April 30, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 उक्त्वानृतं भवेद्यत्र प्राणीनां प्राणरक्षणम्।

अनृतं तत्र सत्यं स्यात्सत्यमप्यनृतं भवेत्।।

अर्थात्, 

  झूठ बोलने से जहाँ प्राणियों की प्राणरक्षा हो सकती हो वहाँ झूठ भी सच है और सच भी झूठ होता है। 

Meaning --

Where telling a lie can save the life of people, there the lie would be true and true becomes lie. 

Wednesday, April 29, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 अपि शाकं पचानस्य सुखं वै मघवन् गृहे।

अर्जितं स्वेन वीर्येण न व्यपाश्रित्य कश्चन।।

अर्थात्,

  हे इन्द्र! किसी दूसरे का सहारा न लेकर वरं अपने पराक्रम से ही अर्जित शाक को पकाने वाले के घर में सुख होता है।

O lndra! Happiness remains there in the house of one who consumes food earned through his own valour without taking any other's help.


सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 न च शत्रुरवज्ञेयो दुर्बलोऽपि बलीयसा। अल्पोऽपि हि दहत्यग्निर्विषमल्पं हिनस्ति च।। अर्थात्,   बलवान व्यक्ति को  शत्रु का उपेक्षा दुर्बल होने ...