सर्वागमानामाचारः प्रथमं परिकल्पते।
आचारः प्रथमो धर्मों धर्मस्य प्रभुरच्युतः।।
अर्थात्,
सभी शास्त्रों में सदाचार मुख्यतः वर्णित हुआ है। सदाचार ही उत्तम धर्म है। धर्म का प्रभु स्वयं भगवान् नारायण हैं।
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सर्वागमानामाचारः प्रथमं परिकल्पते।
आचारः प्रथमो धर्मों धर्मस्य प्रभुरच्युतः।।
अर्थात्,
सभी शास्त्रों में सदाचार मुख्यतः वर्णित हुआ है। सदाचार ही उत्तम धर्म है। धर्म का प्रभु स्वयं भगवान् नारायण हैं।
धर्मेण हन्यते व्याधिर्हन्यते वै तथा ग्रहाः।
धर्मेण हन्यते शत्रुर्यतो धर्मस्ततो जयः॥
अर्थात्,
धर्म के बल पर व्याधि, ग्रहदोष और शत्रु नष्ट हो जाते हैं। इसलिए धर्म ही जय का कारण है॥
Meaning -
Dharma is the only reason of victory. Because of Dharma, all diseases, the karmic influences of planets and the enemies get destroyed.
इदमेव ही पाण्डित्यं चातुर्यमिदमेव ही।
इदमेव सुबुद्धित्वं आयादल्पतरो व्ययः।।
अर्थात्,
अपने आय से भी कम् खर्च करना ही मनुष्य का पाण्डित्य,चतुरता और बुद्धिमता का परिचायक है।
Meaning -
One's income should be more than what he spends and that indicates his knowledge, cleverness and intelligence.
उद्योगे नास्ति दारिद्र्यं जपतो नास्ति पातकम्।
मौनिनः कलहो नास्ति न भयं चास्ति जाग्रतः ।।
अर्थात्,
उद्योगी /परिश्रमी का दारिद्र्य नहीं रहता है। जप करने से पाप दूर होता है। शान्त व्यक्ति का किसी के साथ झगड़ा नहीं होता है। सर्वदा सतर्क रहने वाले व्यक्ति को कभी भय नहीं रहता है।
Meaning -
The rich never face poverty. Recitation of prayer or mantras keep sins away. People who choose peace do not get into fights. And those who always stay prepared never get scared .
यथा देशस्तथा भाषा यथा राजा तथा प्रजाः।
यथा भूमिस्तथा तोयं यथा बीजं तथाऽङ्कुरः।।
अर्थात्,
देश के अनुसार भाषा, जैसे राजा वेसे ही प्रजा, मिट्टी के अनुरूप जल और बीज के अनुरूप अङ्कुर निकलता है।
Meaning -
One should speak the language according to the country, the citizen should behave as per the king, the water follows the soil's nature and sprouts emerge according to the seed's nature.
उत्साहसम्पन्नमदीर्घसूत्रं क्रियाविधिज्ञं विषयेष्वसक्तम्।
शूरं कृतज्ञं दृढसौहृदं च लक्ष्मीः स्वयं याति निवासहेतोः।।
अर्थात्,
उत्साही, आलस्यरहित, कार्य करने के उपायों को जाननेवाले तथा वुरे विषयों से अनासक्त, वीर उपकार को जाननेवाले और उत्तम मित्रता रखने वाले मनुष्य के घर लक्ष्मी स्वयं जाती हैं स्थिर रहने के लिए।
सुखार्थी च त्यजेद् विद्या विद्यार्थी च त्यजेत् सुखम्।
सुखार्थिनः कुतो विद्या कुतो विद्यार्थिनः सुखम्।।
अर्थात्,
सुख के ईच्छा रखने वाले को विद्या छोडना पडता है और विद्या के अभिलाषि को सुख त्याग करना पडता है। सुखाभिलाषी का विद्या कहां होता है और विद्यार्थिओं का सुख कहां?
Meaning --
Education is difficult for those who are tempted by happiness and the one who desires knowledge would sacrifice happiness. There is no knowledge for those who desire pleasure no pleasure for pupils who seek knowledge.
सर्वागमानामाचारः प्रथमं परिकल्पते। आचारः प्रथमो धर्मों धर्मस्य प्रभुरच्युतः।। अर्थात्, सभी शास्त्रों में सदाचार मुख्यतः वर्णित हुआ है...