Sanskrit ki Sanskruti
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Wednesday, July 29, 2026
सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)
Friday, July 24, 2026
सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)
स्वायत्तमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितं छादनमनज्ञतायाः।
विशेषतः सर्वविदांसमाजे विभृषणं मौनमपण्डितानाम् ।।
अर्थात् -
पूर्णतया स्वाधीन रहनेवाली गुण विधाता द्वारा निर्मित मूर्खता /अज्ञानता का ढक्कन स्वरूप है। मौन विशेष रूप से विद्वत्समाज में मूर्खो के लिए आभूषण स्वरूप ही होता है ।
Meaning --
Absolute self-dependent is the lid over ignorance made by almighty . Especially in the world of learned people silence works as ornament for foolish.
Friday, July 3, 2026
NCERT SANSKRIT SHEMUSHI CLASS-10 CHAPTER- 9 BHUKAMPAVIBHEESIKA
२००१ ख्रीष्टाब्द में गणतंत्र दिवस पर्व पर जब समग्र भारतराष्ट्र नृत्य गीत वाद्ययंत्रों के उल्लास में मग्न था तब अचानक ही गुर्जर राज्य चारों ओर से बेचैन, अस्तव्यस्त, विकलक्रन्दन और विपत्ति ग्रस्त हो गया। भूकम्प का भयानक घटणा (प्रलय) समग्र गुर्जरक्षेत्र को विशेषरूप से कच्छजनपद को विनाश के बाद बची हुई वस्तुओं में परिवर्तन किया। भूकम्प का केन्द्रस्वरूप भुजनगर तो मिट्टी के खिलौने के समान टुकडेे होगए। बहुमंजिले मकान क्षण में ही धराशायी होगए(जमीन में मिलगए)। बिजली के खम्बे उखड गये। घरों के सीढीओं के रास्ते बिखर गये। भूमि दो खण्डो में विभाजित हो गई। भूमि के गर्तों से ऊपर निकलती हुई जिनको हटाना कठिन है - ऐसी जलधाराओं से विशाल बाढ का दृश्य उपस्थित हो गया। हजारों संख्या में प्राणियाँ क्षण में ही मृत्यु को प्राप्त हुए। विनष्ट मकानों में हजारों पीडिता सहायता के लिए करुण क्रन्दन करते हैं। हे विधाता! भूख से दुर्बल कण्ठवाले मृतप्राय कुछ शिशु भगवत् कृपा से ही दो तीन दिन जीवन धारण किया था।
यह था कच्छ भूकम्प का अतीव भयावह दृश्य। २००५ ख्रीष्टाब्द में भी कश्मीर प्रान्त में और पाकिस्तान देश में धरती का विशाल कम्पन हुआ। जिस कारण से लाखों लोग असमय मृत्यु को प्राप्त हुए। पृथ्वी किस कारण से प्रकम्पित होता है- इस विषय में वैज्ञानिकों ने कहते हैं कि धरती के गर्भ के भीतर उपस्थित विशाल प्रस्तर जब संघर्षण(घिसने) के कारण टूटते हैँ तब अत्यधिक मात्रा में प्रस्तरों का अपने स्थान से हटना, और हटने से कम्पन होता है॥ वह भयावह कम्पन ही पृथ्वी के उपरि भाग पर भी आकर महाकम्पन उत्पन्न करती है जिसे महाविनाश का दृश्य समुपस्थित होता है।
ज्वालामुखपर्वतों का विस्फोट से भी भूकम्प होता है -ऐसे भूकम्पविशेषज्ञ कहते हैं। पृथ्वी के गर्भ में स्थित अग्नि जब भूमि को खोदने से प्राप्त वस्तु, मिट्टी,प्रस्तर आदि संग्रह को उबालती है तब वो सब ही लावारस को प्राप्त हो कर धरती अथवा पर्वत को फाडकर बाहर निकलता है। तब आकाश धुएँ और राख से ढक जाता है।सेल्सियश-ताप-मात्रा की एकसौ आठ(१०८) अङ्क को प्राप्त यह लावारस जब नदीवेग (नदी के धारा जैसी) से प्रवाहित होता है तब समीप के गाँव अथवा सहर उसके पेट में क्षण में ही समा जाती हैं।
और वेचारे (विवश) प्राणी मरते हैं। ज्वाला को प्रकट करते हुए ये पर्वत भी भीषण भूकम्प उत्पन्न करती हैं।
यद्यपि भूकम्प भाग्य का प्रकोप है, उसको शान्त करने का कोई भी स्थिर उपाय नहीं दिखरहा है। आज भी प्रकृति के सामने विज्ञान से गर्व करने वाला मनुष्य वामन सदृश ही है तथापि भूकम्परहस्य को जानने वाले कहते हैं की बहु मंजिले मकानों का निर्माण नहीं करना चाहीए। नदी किनारे बान्ध बनाकर बृहत् मात्रा में नदी जल को भी एक जगह पर इकट्ठा नहीं करना चाहीए। अन्यथा असन्तुलन के कारण भूकम्प सम्भव है। वस्तुतः(फलस्वरूप) पृथ्वीजलअग्नीवायुआकाश इन पञ्चतत्वों का शान्त होना ही भूभाग का योगक्षेम के लिए उचित है॥ उन अशान्त पञ्चतत्त्व निश्चित रूप से महाविनाश को उपस्थापित करते हैं।
क) समस्तराष्ट्रं नृत्य-गीतवादित्राणाम् उल्लासे मग्नम् आसीत्।
ख) भूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः कच्छजनपदः आसीत्।
घ) समग्रं विश्वम् विपन्नैः आतंकितः दृश्यते।
ङ) ज्वालामुखपर्वतानां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायते।
च) बहुभूमिकानि भवनानि धराशायीनि जायन्ते।
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Tuesday, June 30, 2026
NCERT SANSKRIT SHARADA CLASS - 9 CHAPTER - 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
अनुवाद -
संस्कृत-भाषा भारतीयों का एकता साधन करती है, भारतीयत्व सम्पादन करती है, ज्ञानसमूहों का प्रकाश/आलोक दिखाती है और सर्वदा आनन्द के परम्परा को उत्पन्न करती है।
संस्कृत सभी लोगों के मन को शुद्ध करता है, सभी के वचनों को परिष्कार करता है, सन्मार्ग का प्रेरणा देता है, सद्गुणों का समूहों को ही उत्पादन करता है।
संस्कृत विश्वबन्धुत्व का विस्तार करता है, सभी प्राणियों के ऐक्य को समझाता है , चारों ओर शान्ति प्रतिष्ठा करता है और प्रसिद्ध पाञ्च शील/स्वभाव का रीति भी है।
संस्कृत त्याग, हर्ष और सेवा का व्रत है , प्रपञ्च/संसार का मङ्गल ही करना चाहिए - ऐसा ज्ञान और विज्ञान से संयुक्त विचार है तथा भोग और मोक्ष का मार्ग को प्राप्त/उदय कराता है।
धर्म के, कामनाओं का,अर्थ का और मोक्ष का भी साधन संस्कृत से मिलता है। इहलोक और परलोक में संस्कृत से उन्नति मिलती है। भक्ति आचरण करने के लिए, ज्ञान प्राप्ति के लिए और कर्म करने के लिए संस्कृत साधन है। इसलिए संस्कृत सत्य, शिव(/कल्याणकारी) और सुन्दर है।
ललित शब्द संस्कृत रूपी वन में पेड़ सदृश हैं। यह मनोहर मधुर रस की धारागृह है। विश्व प्राणियों के मन को चमत्कार प्राप्त होता है। भारतीय पूर्वजों के कीर्ति समूहों का द्योतक है संस्कृत।
अभ्यासाद् जायते सिद्धिः -
२. एकपदेन उत्तरं लिखत -
क) संस्कृतं कस्याः साधकम्? भारतीयैकतायाः
ख) सर्वदा संस्कृतं कस्य संदोहदम्? आनन्दस्य
ग) संस्कृतं कस्य प्रेरणादायकम्? सत्पथस्य
घ) संस्कृतं कासां परिष्कारकम्? सर्ववाणीनाम्
च) कस्य विस्तारकं संस्कृतम्? विश्वबन्धुत्वस्य
३. अधोलिखितप्रश्नानां उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत —
(क) सर्वतः कस्याः संस्थापकं संस्कृतम्?
उत्तरम् - सर्वतः शान्त्त्याः संस्थापकं संस्कृतम्।
(ख) कीदृशं व्रतं संस्कृतम्?
उत्तरम् - त्यागसन्तोषसेवायाः च व्रतं संस्कृतम्?
(ग) कयोः सम्मेलनम् संस्कृतम्?
उत्तरम् - ज्ञानविज्ञानयोः सम्मेलनम् संस्कृतम्।
(घ) संस्कृतं कस्य चमत्कारकम्?
उत्तरम् - संस्कृतं विश्वचेतस्य चमत्कारकम्।
(ङ) केषां यशः स्मारकं संस्कृतम्?
उत्तरम् - पूर्वजानां यशः स्मारकं संस्कृतम्।
४. रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
यथा—..सर्वभूतैकता...-कारकं संस्कृतम्।
(क) ....भारतीयत्व सम्पादकं संस्कृतम्।
(ख) ...ज्ञानपुञ्जप्रभा.... दर्शकं संस्कृतम्।
(ग) ...सर्वमस्तिष्क...संस्कारकं संस्कृतम्।
(घ) कर्मदं.....ज्ञानदं.... भक्तिदं संस्कृतम्।
(ङ) सत्यनिष्ठं ....शिवं सुन्दरं... संस्कृतम्।
(च) शब्दलालित्य ...लीलावनं... संस्कृतम्।
५. मञ्जूषाया: पदानि उपयुज्य षड् वाक्यानि रचयत —
क) संस्कृत-भाषा भारतीयानां एकता साधयति।/अङगुलीनां एकता हेतोः मुष्टिः संभवति।
ख) विश्वस्य सर्वतः संस्कृत भाषा शान्तिं संस्थापयति।/ सर्वतः प्रासादानां विस्तारेण हरितबृक्षाः क्रीडाप्रान्तराश्च नष्टाः जायन्ते।
ग) सत्पथे प्रेरयितुं संस्कृत-भाषा शिक्षयति।/अस्मान् सत्पथे प्रेरयितुं अस्माकं परिवारस्यावदानं श्रेष्ठमस्ति।
घ) स्वामी विवेकानन्दो तथा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आदीनां पूर्वजानां कार्याणि विश्वकल्याणाय उद्दिष्टानि।
ङ) जीवने समृद्धिनिमित्तं त्यागस्य अत्यावश्यकमस्ति।
च) 'लौहपुरुषः' इत्युपाधिः सर्दार वल्लभभाई पटेल महोदयस्य सेवाव्रतस्य परिचायिका अस्ति।
६. अधोलिखितानां समस्तपदानां उदाहरणानुसारं विग्रहं कुरुत —
क)। ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकम् - ज्ञानपुञ्जप्रभायाः दर्शकम्
ख) सर्ववाणीपरिष्कारकम् - सर्ववाण्याः परिष्कारकम्
ग) विश्वबन्धुत्वविस्तारकम् - विश्वबन्धुत्वस्य विस्तारकम्
घ)। सर्वभूतैकताकारकम् - सर्वभूतैकतायाः कारकम्
ङ) शान्तिसंस्थापकम् - शान्त्याः संस्थापकम्
च) ज्ञानविज्ञानसम्मेलनम् - ज्ञानविज्ञानयोः सम्मेलनम्
७. प्रदत्तमञ्जूषातः पर्यायपदानि चित्वा रिक्तस्थाने लिखत
—
क) (क) विद्वांसः .तेजोराशयः.. भवन्ति ।
(ख) सूर्यस्य....किरणः..सर्वेषां प्राणीनां कृते हितकरः भवति ।
(ग) ईश्वरं स्मृत्वा ...उल्लासः..उपजायते।
(घ) विद्यायाः ...मानम्.... अजरं भवति ।
(ङ) प्रकृतेः शोभा .... अनुपमा... विद्यते।
(च) यत्र....जगत्.... एकनीडं भवति ।
८. अधोलिखितानां मेलनं कुरुत —
(क) भारतीयैकतायाः - २. साधकम्
(ख) सत्पथे - ४. प्रेरणादायकम्
(ग) त्यागसन्तोषसेवारूपम् - ५. व्रतम्
(घ) ज्ञानपुञ्जप्रभायाः - ३. दर्शकम्
(ङ) विश्वबन्धुत्वस्य - १. विस्तारकम्
समाप्तम्
Wednesday, June 3, 2026
सुभाषितम्( THOUGHT OF THE DAY)
दुर्लभान्यपि कार्याणि सिध्यन्ति प्रोद्यमेन ही।
शिलापि तनुतां याति प्रपातेनार्णसो मुहुः।।
अर्थात्,
कठिन से कठिनतर कार्य भी उद्यम/प्रयास से निश्चितरूप से सिद्धिप्रद/सफल होते हैं। क्योंकि जल बार-बार गिरने से पत्थर भी क्षीण/छोटा हो जाता है।
Meaning -
Difficult actions certainly get success due to continuous effort. Just as regular flow of water even shorten the stone.
Monday, June 1, 2026
सुभाषितम्( THOUGHT OF THE DAY)
सा विद्या या मदं हन्ति सा श्रीर्यार्थिषु वर्षति।
धर्मानुसारिणी या च सा बुद्धिरभिधीयते॥
अर्थात्,
विद्या वह है, जो अहंकार को नष्ट करे। लक्ष्मी वह है जो याचकों पर वरषे । बुद्धि वह कही जाती है जो धर्मानुसारिणी हो।
Meaning -
Wisdom is that which keeps pride away. Lakshmi/ wealth is that which showers upon the supplicants. And intellect is said to be that which follows 'Dharma'.
Sunday, May 31, 2026
ANKA GANANAM( COUNTING OF NUMBERS)
ब्रम्हेकम् (१)
पक्षद्वयम् (२)
त्रिसन्ध्यम् (३)
चतुर्वेदम् (४)
पञ्चामृतं (५)
षड् ऋतवः (६)
सप्त वासराः (७)
अष्ट प्रहराः (८)
नव रसाः (९)
दश अवताराः (१०) ।।
सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)
दीर्घप्रयासेन कृतं हि वस्तु निमेषमात्रेण भजेद् विनाशम्। कर्तुं कुलालस्य तु वर्षमेकं भेत्तुं हि दण्डस्य मुहूर्तमात्रम्।। अर्थात् - बहुत ...
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1. मुखम् - Face 2. कपालः - Skull 3. चिकूरः - Hair 4. कर्कराला - A curl of hair, ringlet 5. अलिकं - Forehead 6. कर्ण...