Saturday, April 25, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 असत्यवचनं प्राज्ञः प्रमादेनापि न वदेत्।

श्रेयांसि येन भज्यन्ते वात्ययेव महाद्रुमाः।।

अर्थात्,

 बुद्धिमान् व्यक्ति कभी गलती से भी असत्य भाषण नहीं वोलना चाहिये क्योंकि उससे कल्याण वैसे टूट जाते हैं (/नष्ट हो जाते हैं) जैसे आंधी से महावृक्ष।

Meaning -

      A wise man should never tell a lie even by mistake. Because this breaks the good fortune just like the storm uproots the big trees.

Thursday, April 23, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 पीत्वा रसं तु कटुकं मधुरं समानं 

माधुर्यमेव जनयेन्मधुमक्षिकासौ।

सन्तस्तथैव समसज्जनदुर्जनानां

श्रुत्वा वचः मधुरसूक्तरसं सृजन्ति।।

अर्थात्,

  मधुर रस के साथ कड़ुवे रस को भी पान कर यह मधुमक्खी मधुर रस को ही निष्पन्न करती है; वेसे ही विद्वान व्यक्ति सज्जनों के साथ दुर्जनों का भी वचन सुनकर मधुर तथा उत्तम वचन रूपी रस का निर्माण करते हैं।

Meaning -

    The honey bee consumes sweet juices as well as bitter one but produce only honey which is sweet in nature . Like that, wise people create only sweet and noble talks, what type of talks they listen from good and bad persons .

Wednesday, April 22, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 संपदि यस्य न हर्षो विपदि विषादो रणे च भीरूत्वम्।

तं भुवनत्रयतिलकं जनयति जननी सुतं विरलम्।।

अर्थात्,

    जिसे संपत्ति आने पर अधिक प्रसन्नता और संकट आने पर दुःख न हो तथा युद्ध में जिसे भय न हो, त्रिभुवन में श्रेष्ठ ऐसे पुत्र को विरल ही कोई माता जन्म देती है।

Meaning -

It's rare for any mother to  give birth to a child who is best amongst the three worlds  who neither becomes happy when  wealth arrives nor is frustrated in difficult times and is not afraid of war .


     

Wednesday, April 1, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 घृष्टं घृष्टं पुनरपि पुनश्चन्दनं चारुगन्धं,

छिन्नः छिन्नः पुनरपि पुनः स्वादुमानिक्षुदण्डः।

दग्धं दग्धं पुनरपि पुनः काञ्चनं कान्तवर्णं,

प्राणान्तेऽपि प्रकृति विकृतिर्जायते नोत्तमानाम्।।

अर्थात्,

      चन्दन काष्ठ को वारवार घिसने से उसमें से सुमधुर वास उत्पन्न होता है। गन्ना वारवार चर्वित होने पर स्वादुयुक्त होता है। सुवर्ण आग में जलने से कमनीय वर्ण धारण करता है। उसी प्रकार प्राण जाते समय सज्जनों के स्वभाव परिवर्तित नहीं होते हैं। 

Tuesday, March 31, 2026

सुभाषितम(NOBLE THOUGHTS)

 यथा कालकृतोद्योगात् कृषिः फलवती भवेत्।

तद्वन्नीतिरीयं देव चिरात् फलति न क्षणात्।।

अर्थात्,

   समय के अनुसार परिश्रम करने से जैसे कृषि कार्य भविष्यत में/कुछ समय बाद सफल होता है; वैसे ही नीतिवाक्यों को उचित समय में पालन करने से उसका लाभ उसी समय नहीं वरं भविष्यत में मिलता है।

Meaning -

    As farming would be fruitful after some days if working hard according to the nature/time. In the same way if one follows the noble thoughts in one's life will get success one day but not all of a sudden.

Saturday, March 28, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 सर्वागमानामाचारः प्रथमं परिकल्पते।

आचारः प्रथमो धर्मों धर्मस्य प्रभुरच्युतः।।

अर्थात्,

      सभी शास्त्रों में सदाचार मुख्यतः वर्णित हुआ है। सदाचार ही उत्तम धर्म है। धर्म का प्रभु स्वयं भगवान् नारायण हैं।


Friday, March 27, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 

धर्मेण हन्यते व्याधिर्हन्यते वै तथा ग्रहाः।

धर्मेण हन्यते शत्रुर्यतो धर्मस्ततो जयः॥

अर्थात्,

      धर्म के बल पर व्याधि, ग्रहदोष और शत्रु नष्ट हो जाते हैं। इसलिए धर्म ही जय का कारण है॥

Meaning -

      Dharma is the only reason of victory. Because of Dharma, all diseases, the karmic influences of planets and the enemies get destroyed.

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 असत्यवचनं प्राज्ञः प्रमादेनापि न वदेत्। श्रेयांसि येन भज्यन्ते वात्ययेव महाद्रुमाः।। अर्थात्,  बुद्धिमान् व्यक्ति कभी गलती से भी असत्य भाषण...