Thursday, September 3, 2026

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

Shloka:

मूढ़ जहीहि धनागम तृष्णां, कुरु सद्बुद्धिं मनसि वितृष्णाम्।

यल्लभसे निजकर्मोपात्तं, वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ।।

अर्थात्:

हे मुर्ख! धन विषयक प्यास को छोड़ दो, उस मन में परमात्मा विषयक विचार कर। अपने कर्मों से प्राप्त धन से ही मन को प्रसन्न कर। 

Meaning:

O fool! Give up the thirst relating to wealth and cleanse your mind with spiritual thought about almighty. You please the mind by the wealth gained from your actions. 

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

Shloka: मूढ़ जहीहि धनागम तृष्णां, कुरु सद्बुद्धिं मनसि वितृष्णाम्। यल्लभसे निजकर्मोपात्तं, वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ।। अर्थात्: हे मुर्ख! ध...