Thursday, July 30, 2026

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

 

कर्णामृतं सूक्तिरसं विमुच्य दोषेषु यत्नः सुमहान् खलानाम्। 

निरीक्षते  केलिवनं प्रविश्य क्रमेलकः कण्टकजालमेव।। 

अर्थात् --

 कान के लिए अमृत स्वरूप सूक्ति(/उत्तम वाक्यों जैसे)  रसको छोड़कर बड़े बड़े दुर्जनों का प्रयास दोष निकालने में रहता है। आमोददायक वन में प्रवेश कर ऊँट काण्टेवाले पौधों को ही निरीक्षण करता है। 

Meaning --

          Wicked people always try to find fault leaving the essence of good sayings which are nectar for ear. Just like a camel looks only the thorny bushes entering into a sportive place .

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