Tuesday, June 18, 2024

NCERT SANSKRIT SHEMUSHI CLASS-10 CHAPTER- 9 BHUKAMPAVIBHEESIKA

 


          २००१ ख्रीष्टाब्द में गणतंत्र दिवस पर्व पर जब समग्र भारतराष्ट्र नृत्य गीत वाद्ययंत्रों के उल्लास में मग्न था तब अचानक ही गुर्जर राज्य चारों ओर से बेचैन, अस्तव्यस्त, विकलक्रन्दन और विपत्ति ग्रस्त हो गया। भूकम्प का भयानक घटणा (प्रलय) समग्र गुर्जरक्षेत्र को विशेषरूप से कच्छजनपद को विनाश के बाद बची हुई वस्तुओं में परिवर्तन किया। भूकम्प का केन्द्रस्वरूप भुजनगर तो मिट्टी के खिलौने के समान टुकडेे होगए। बहुमंजिले मकान क्षण में ही धराशायी होगए(जमीन में मिलगए)। बिजली के खम्बे उखड गये। घरों के सीढीओं के रास्ते बिखर गये। भूमि दो खण्डो में विभाजित हो गई। भूमि के गर्तों से ऊपर निकलती हुई जिनको हटाना कठिन है - ऐसी जलधाराओं से विशाल बाढ का दृश्य उपस्थित हो गया। हजारों संख्या में प्राणियाँ क्षण में ही मृत्यु को प्राप्त हुए। विनष्ट मकानों में  हजारों पीडिता सहायता के लिए करुण क्रन्दन करते हैं। हे विधाता! भूख से दुर्बल कण्ठवाले मृतप्राय कुछ शिशु भगवत् कृपा से ही दो तीन दिन जीवन धारण किया था।
           यह था कच्छ भूकम्प का अतीव भयावह दृश्य। २००५ ख्रीष्टाब्द में भी कश्मीर प्रान्त में और पाकिस्तान देश में धरती का विशाल कम्पन हुआ।  जिस कारण से लाखों लोग असमय मृत्यु को प्राप्त हुए। पृथ्वी किस कारण से प्रकम्पित होता है- इस विषय में वैज्ञानिकों ने कहते हैं कि धरती के गर्भ के भीतर उपस्थित विशाल प्रस्तर जब संघर्षण(घिसने) के कारण टूटते हैँ तब अत्यधिक मात्रा में प्रस्तरों का अपने स्थान से हटना, और हटने से कम्पन होता है॥ वह भयावह कम्पन ही पृथ्वी के उपरि भाग पर भी आकर महाकम्पन उत्पन्न करती है  जिसे महाविनाश का दृश्य समुपस्थित होता है।
          ज्वालामुखपर्वतों का विस्फोट से भी भूकम्प होता है -ऐसे भूकम्पविशेषज्ञ कहते हैं। पृथ्वी के गर्भ में स्थित अग्नि जब भूमि को खोदने से प्राप्त वस्तु, मिट्टी,प्रस्तर आदि संग्रह को उबालती है तब वो सब ही लावारस को प्राप्त हो कर धरती अथवा पर्वत को फाडकर बाहर निकलता है। तब आकाश धुएँ और राख से ढक जाता है।सेल्सियश-ताप-मात्रा की एकसौ आठ(१०८) अङ्क को प्राप्त यह लावारस जब नदीवेग (नदी के धारा जैसी) से प्रवाहित होता है तब समीप के गाँव अथवा सहर उसके पेट में क्षण में ही समा जाती हैं। 
     और वेचारे (विवश) प्राणी मरते हैं। ज्वाला को प्रकट करते हुए ये पर्वत भी भीषण भूकम्प उत्पन्न करती हैं।
     यद्यपि भूकम्प भाग्य का प्रकोप है, उसको शान्त करने का कोई भी स्थिर उपाय नहीं दिखरहा है। आज भी प्रकृति के सामने विज्ञान से गर्व करने वाला मनुष्य वामन सदृश ही है तथापि भूकम्परहस्य को जानने वाले कहते हैं की बहु मंजिले मकानों का निर्माण नहीं करना चाहीए। नदी किनारे बान्ध बनाकर बृहत् मात्रा में नदी जल को भी एक जगह पर इकट्ठा नहीं करना चाहीए। अन्यथा असन्तुलन के कारण भूकम्प सम्भव है। वस्तुतः(फलस्वरूप) पृथ्वीजलअग्नीवायुआकाश इन पञ्चतत्वों का शान्त होना ही भूभाग का  योगक्षेम के  लिए उचित है॥ उन अशान्त पञ्चतत्त्व निश्चित रूप से महाविनाश को उपस्थापित करते हैं। 
अभ्यासः

१.  अधोलिखितानां प्रश्नानां उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत  -
क)    समस्तराष्ट्रं  नृत्य-गीतवादित्राणाम्  उल्लासे मग्नम् आसीत्।
ख) भूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः कच्छजनपदः आसीत्।
ग) पृथिव्याः स्खलनात् कम्पनं जायते।
घ) समग्रं विश्वम् विपन्नैः आतंकितः दृश्यते।
ङ) ज्वालामुखपर्वतानां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायते।
च) बहुभूमिकानि भवनानि धराशायीनि जायन्ते।
२.  
क) भूकम्पविभीषिका विशेषेण कच्छजनपदं केषु परिवर्तितवती?
ख) के कथयन्ति यत् पृथिव्याः अन्तर्गर्भे, पाषाणशिलानां संघर्षणेन कम्पनं जायते?
ग)  विवशाः प्राणिनः कुत्र पिपीलिका इव निहन्यन्ते?
घ) किदृशी भयावहघटना गढ़वाल  क्षेत्रे घटिता?
ङ) तदिदानीं किं विचारणीयम् तिष्ठति?
४.  
क) समग्रं भारतम् उल्लासे मग्नः अस्ति। 
ख) भूकम्पविभीषिका कच्छजनपदं विनष्टं कृतवती।
ग) क्षणेनैव प्राणिनः गृहविहीनाः अभवन्।
घ) शान्तानि पञ्चतत्त्वानि भूतलस्य योगक्षेमाभ्यां भवन्ति।
ङ)  मानवाः पृच्छन्ति यत् बहुभूमिकभवननिर्माणं करणीयम्    न वा?
च) नदीवेगेन ग्रामाः तदुदरे समाविशेत्।
५.
(अ )   परसवर्णसन्धिनियमानुसारम्  -
  क)  किञ्च  -   किम्   +    च
   ख)   नगरन्तु   -   नगरम्    +   तु
   ग)   विपन्नञ्च   -    विपन्नम्   +   च
  घ)    किन्नु    -    किम्   +   नु
   ङ)   भुजनगरन्तु    -   भुजनगरम्   +   तु
   च)    सञ्चयः    -   सम्    +    चयः
(आ)  विसर्गसन्धिनियमानुसारम्   -
    क)   शिशवस्तु    -   शिशवः   +   तु
   ख)    विस्फोटैरपि     -     विस्फोटैः    +   अपि
   ग)   सहस्रशोऽन्ये   -     सहस्रशः     +   अन्ये
   घ)    विचित्रोऽयम्   -    विचित्रः   +   अयम्
   ङ)   भूकम्पो जायते   -   भूकम्पः   +   जायते
   च)    वामनकल्प एव   -   वामनकल्पः   +     एव
६.   (अ)    विलोमपदानां  संयोगं कुरुत   -
                                      क                                     ख
                             सम्पन्नम्                            विपन्नम्
                           ध्वस्तभवनेषु                         नवनिर्मितभवनेषु
                        निस्सरन्तीभिः                               प्रविशन्तीभिः
                                निर्माय                            विनाश्य
                                क्षणेनैव                          सुचिरेणैव
(आ)   समानार्थकपदानां संयोगं कुरुत  - 
                                क                                    ख
                            पर्याकुलम्                       व्याकुलम्
                       विशीर्णाः                                    नष्टाः
                                    उद्गिरन्तः                   प्रकटयन्तः
                                     विदार्य                                      संत्रोट्य
                                 प्रकुपिताम्                       क्रोधयुक्ताम्
     


 ७.  (अ)    प्रकृति-प्रत्यययोः विभागं कुरुत  -
        परिवर्तितवती   -    परि    +   वृत्    +क्तवतु   +   ङीप्  (स्त्री)
       धृतवान्            -      धृ   +    क्तवतु
                 हसन्   -   हस्  +   शतृन्
       विशीर्णा   -    वि    +   शृ  +     क्त    +टाप्
    प्रचलन्ती    -      प्र   +   चल्    +    शतृ    +   ङीप्  (स्त्री)
    हतः     -    हन्            +          क्त
    (आ)   समस्तपदानि लिखत  -
     महत् च तत्  कम्पनं  -   महत्कम्पनं
   दारुणा च सा विभीषिका   -   दारुण-विभीषिका
     ध्वस्तेषु च तेषु भवनेषु   -   ध्वस्तभवनेषु
   प्राक्तने च तस्मिन् युगे    -     प्राक्तनयुगे
    महत् च तत् राष्ट्रं  तस्मिन्   -   महद्राष्ट्रे









   

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