Monday, May 4, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 उच्चासनगतो नीचो नीचः एव न चोत्तमः।

प्रासादशिखरस्थोपि काकः न गरुडायते।।

अर्थात्,

   ऊँचे पद पर आसीन होने पर भी नीच नीच ही रहता है,उत्तम नहीं बन पाता। जैसे महल के शिखर पर बैठा हुआ कौवा कभी गरूड नहीं बनता है। 

Meaning --

  A despicable /mean person remains mean even though he holds a high position ; but can't be perfect. Just like the crow sitting on the top of the  palace cannot be a vulture .


Sunday, May 3, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 अक्रमेणानुपायेन कर्मारम्भो न सिध्यति।

अर्थात्,

विना क्रम के और विना युक्ति के शुरु किया गया काम सफल नहीं होता है।

Meaning --

  The work started without any arrangement and planning doesn't succeed. 

Friday, May 1, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS

 सुजनो न कुप्यत्येव अथ कुप्यति विप्रियं न चिन्तयति।

अथ चिन्तयति न जल्पति अथ जल्पति लज्जितो भवति।।

अर्थात्,

   सज्जन क्रोध नहीं करता है यदि कभी क्रोध करता है तब अनिष्ट नहीं सोचता है और यदि सोचता है तब अप्रिय नहीं बोलता है और यदि बोलता है तब लज्जित होता है।

Meaning --

A wise man doesn't get angry and if ever he would do so then he won't think about to blame. If he thinks to do so then he would not talk unpleasant. And if he tells so then he would be  ashamed. 

  

Thursday, April 30, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 उक्त्वानृतं भवेद्यत्र प्राणीनां प्राणरक्षणम्।

अनृतं तत्र सत्यं स्यात्सत्यमप्यनृतं भवेत्।।

अर्थात्, 

  झूठ बोलने से जहाँ प्राणियों की प्राणरक्षा हो सकती हो वहाँ झूठ भी सच है और सच भी झूठ होता है। 

Meaning --

Where telling a lie can save the life of people, there the lie would be true and true becomes lie. 

Wednesday, April 29, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 अपि शाकं पचानस्य सुखं वै मघवन् गृहे।

अर्जितं स्वेन वीर्येण न व्यपाश्रित्य कश्चन।।

अर्थात्,

  हे इन्द्र! किसी दूसरे का सहारा न लेकर वरं अपने पराक्रम से ही अर्जित शाक को पकाने वाले के घर में सुख होता है।

O lndra! Happiness remains there in the house of one who consumes food earned through his own valour without taking any other's help.


Tuesday, April 28, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 आनन्दवाष्परोमाञ्चौ यस्य स्वेच्छावशंबदौ।

किं तस्य साथनैरनैः किङ्कराः सर्वपार्थिवाः।।

अर्थात्,

आनन्द के अश्रु तथा रोमाञ्च जिसके इच्छा के अधीन है ,उसे अन्य साधनों की क्या प्रयोजन? सभी राजा उसके नौकर हैं।

   Meaning -

  When the tears of joy and horripilation/goosebumps are subject to/obedient to one's own  wish/desire, then what other means/instruments does he require? Thus all kings are his slaves/servants.

Monday, April 27, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 न गणस्याग्रतो गच्छेत्सिद्धे कार्ये समम्फलम्।

यदि कार्य विपत्तिः स्यान्मुखरस्तत्र हन्यते।। 

अर्थात्, 

जनसमूह का मुखिया वनकर न जाएं , क्योंकी कार्य सिद्ध होने पर सव बराबर के फल के हिस्सेदार होंगे। यदि काम विगड़ गया तब मुखिया ही मार खाते हैं।

Meaning -

  One should not lead the gathering.as a chief Because the fruit of the action will be shared equally amongst all if the succeeds. But the leader is beaten up if it fails.

   

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 न च शत्रुरवज्ञेयो दुर्बलोऽपि बलीयसा। अल्पोऽपि हि दहत्यग्निर्विषमल्पं हिनस्ति च।। अर्थात्,   बलवान को दुर्बल शत्रु का भी उपेक्षा नहीं करनी च...