पित्रा पुत्रो वयःस्थोपि सततं वाच्य एव तु।
यथा स्याद् गुणसंयुक्तः प्राप्नुयात् च महद् यशः।।
अर्थात्,
पुत्र वयस्क होने पर भी पिता सर्वदा कहता/समझाता रहना चाहिए जिससे वह गुणी बने और अधिक यश प्राप्त कर सकें।
Meaning -
The father should keep advising the son even after growing up so that the latter can become moral and more famous.
No comments:
Post a Comment