Sunday, April 26, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 पित्रा पुत्रो वयःस्थोपि सततं वाच्य एव तु।

यथा स्याद् गुणसंयुक्तः प्राप्नुयात् च महद् यशः।।

अर्थात्,

    पुत्र वयस्क होने पर भी पिता सर्वदा कहता/समझाता रहना चाहिए जिससे वह गुणी बने और अधिक यश प्राप्त  कर सकें।

Meaning -

   The father should keep advising the son even after growing up so that the latter can become moral and more famous.


No comments:

Post a Comment

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 न गणस्याग्रतो गच्छेत्सिद्धे कार्ये समम्फलम्। यदि कार्य विपत्तिः स्यान्मुखरस्तत्र हन्यते।।  अर्थात्,  जनसमूह का मुखिया वनकर न जाएं , क्योंकी...