Tuesday, November 18, 2025

सुभाषितम् (THOUGHT OF THE DAY)

 वचस्तत्रैव वक्तव्यं यत्रोक्तं सफलं भवेत्। 

स्थायी भवति चात्यन्तं रंगः शुक्लपट्टे यथा।। 

अर्थात्, 
           जहाँ बोलने पर वचन सफल होगा, उस स्थान में अपनी वात रखनी चाहीये। जैसे सफेद वस्त्र में रंग अत्यधिक  स्थायी होता है ।।

Meaning :

          One should put their words in that place where the purpose of sayings would be successful. Just like colors are more visible and permanent on white clothes rather on any other. 

Monday, November 17, 2025

सुभाषितम् (THOUGHT OF THE DAY)

 मृगा मृगैः संगमनु्व्रजन्ति

गावश्च गोभिस्तुरगास्तुरंगैः।

मूर्खाश्च मूर्खैः सुधियः सुधीभिः

समानशील व्यसनेषु सख्यम्।।


अर्थात्,  

        हिरण हिरणों के साथ, गाय गायों के साथ, अश्व अश्वों के साथ, मुर्ख मुर्खों के साथ और पण्डित पण्डितों के साथ मिलकर रहना चाहते हैं। इससे ज्ञात होता है कि  समान स्वभाव और समान व्यसनवाले प्राणीयों का परस्पर मित्रता होता है। 


Meaning --


         Deer with deer, cow with cows, horse with horses, fool with fools and learned with learned people live together. This meant that the creatures of same nature and of same  conduct have friendships with each other.

Monday, November 3, 2025

सुभाषितम् (THOUGHT OF THE DAY)

 अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।

उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।।

अर्थात् -
           " यह अपना अथवा पराया" -ऐसा विचार क्षुद्र हृदय वाले व्यक्तियों का है। परंतु उदार हृदय वाले व्यक्तियों के लिए " केवल पृथ्वी एक परिवार है"।

Meaning -

             "This is mine or others" - this consideration or thought is of narrow minded people. But for noble minded/magnanimous persons "only the Earth is one family ".

Tuesday, October 28, 2025

सुभाषितम् (THOUGHT OF THE DAY)

 जलबिन्दूनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः। 

स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च।। 

अर्थात्  --  
            जल की एक एक बूंद  गिरने से जैसे धीरे धीरे घड़ा भर जाता है वही कारण सव प्रकारकी विद्याओं का, धनका और धर्मका भी है ।

Meaning  --

         Just like with every drop of water the pot gets fill slowly, the same applies on acquiring  education, richness and righteousness also.

Sunday, October 5, 2025

सुभाषितम् (THOUGHT OF THE DAY)

 कटुतिक्तकषायाणि वातलानि लघूनि च। 

वर्जयेदन्नपानानि शिशिरे शीतलानि च।। 

   अर्थात् -
            शिशिर काल में  कड़ुवे, तिक्त, कसैले, वायुकारक और लघु तथा ठण्डे खानपानको छोड़ देना चाहिए। 
Meaning -
            In winter one should abstain from eating food like pungent, bitter, astringent, aerated food and light and cold food.

          

Saturday, August 9, 2025

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

 अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।

चत्वारि तस्य बर्धन्ते आयुर्विद्यायशोबलम्॥(महर्षि मनुः)

 अर्थ  -    

          प्रतिदिन नियमितरूपसे गुरुजनों को प्रणामक़रनेवाले तथा वयस्कज्ञानीजनों का सेवा करनेवाले व्यक्ति का आयु, विद्या, कीर्ति और शक्ति - इन चारों का वृद्धि होती है।


Monday, August 4, 2025

सुभाषितम् (THOUGHT OF THE DAY)

 

श्रुतिर्विभिन्नाः स्मृतयश्च भिन्ना 

नैको मुनिर्यस्य वचः प्रमाणम्।

धर्मस्य तत्त्वं निहितं गुहायां

महाजनो येन गतः स पन्थाः।।
 
अर्थः -
           वेद वाक्य अलग अलग हैं। स्मृतिवाक्य भी भिन्न हैं। कोई भी एक ही मुनि का वचन प्रमाण नहीं होता है। धर्म के तत्त्व अत्यन्त सूक्ष्म है। इसलिए महान् व्यक्तियों के द्वारा प्रदर्शित चिराचरित प्रथा ही उत्कृष्ट मार्ग है। 

Meaning  -

                    There are differences in the sayings of Vedas. The statements of Smriti Shastra are also different. The truth of righteousness is very much subtle or deep. So the classical traditions and customs are the best path which shown by the great persons. 

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

Shloka: मूढ़ जहीहि धनागम तृष्णां, कुरु सद्बुद्धिं मनसि वितृष्णाम्। यल्लभसे निजकर्मोपात्तं, वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ।। अर्थात्: हे मुर्ख! ध...