परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्।।
परोक्ष में काम बिगाड़ने वाले और सामने प्रिय बोलने वाले मित्र को मुखपर दूधवाले विष(जहर) से भरे घड़े के समान छोड़ देना चाहिए।
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परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्।।
परोक्ष में काम बिगाड़ने वाले और सामने प्रिय बोलने वाले मित्र को मुखपर दूधवाले विष(जहर) से भरे घड़े के समान छोड़ देना चाहिए।
अनाहूतो विशेद् यस्तु अपृष्टो वहुभाषते।
आत्मानं मन्यते प्रीतं भूपालस्य स दुर्मतिः॥
अर्थात् -
विना बुलाए जो पास आता है, विना पुछे जो वहुत कुछ कहता है, जो स्वयं को शासक का अतिप्रिय मानता है, वो निर्वोध है।
Meaning : -
One who comes without calling, the one who speaks more without being asked and the one who feels that he is favored by the ruler is a fool.
वचस्तत्रैव वक्तव्यं यत्रोक्तं सफलं भवेत्।
मृगा मृगैः संगमनु्व्रजन्ति
गावश्च गोभिस्तुरगास्तुरंगैः।
मूर्खाश्च मूर्खैः सुधियः सुधीभिः
समानशील व्यसनेषु सख्यम्।।
अर्थात्,
हिरण हिरणों के साथ, गाय गायों के साथ, अश्व अश्वों के साथ, मुर्ख मुर्खों के साथ और पण्डित पण्डितों के साथ मिलकर रहना चाहते हैं। इससे ज्ञात होता है कि समान स्वभाव और समान व्यसनवाले प्राणीयों का परस्पर मित्रता होता है।
Meaning --
Deer with deer, cow with cows, horse with horses, fool with fools and learned with learned people live together. This meant that the creatures of same nature and of same conduct have friendships with each other.
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
जलबिन्दूनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः।
कटुतिक्तकषायाणि वातलानि लघूनि च।
उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्। मौनिनः कलहो नास्ति न भयं चास्ति जाग्रतः ।। अर्थात्, उद्योगी /परिश्रमी का दारिद्रय नह...