Wednesday, March 18, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 उत्साहसम्पन्नमदीर्घसूत्रं क्रियाविधिज्ञं विषयेष्वसक्तम्।

शूरं कृतज्ञं दृढसौहृदं च लक्ष्मीः स्वयं याति निवासहेतोः।।

अर्थात्,

        उत्साही, आलस्यरहित, कार्य करने के उपायों को जाननेवाले तथा वुरे विषयों से अनासक्त, वीर उपकार को जाननेवाले और उत्तम मित्रता रखने वाले  मनुष्य के घर लक्ष्मी स्वयं जाती हैं स्थिर रहने के लिए।



No comments:

Post a Comment

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS

 सुजनो न कुप्यत्येव अथ कुप्यति विप्रियं न चिन्तयति। अथ चिन्तयति न जल्पति अथ जल्पति लज्जितो भवति।। अर्थात्,    सज्जन क्रोध नहीं करता है यदि क...