Saturday, January 28, 2023

SUBHASITAM (NOBLE THOUGHTS)

 

                                               

 गुरवो वहवः सन्ति शिष्यवित्तापहारकाः।

 दुर्लभः स गुरुर्लोके शिष्यचित्तापहारकः॥

 अनुवादः  -

      शिष्य से धन अपहरण करनेवाले गुरु अनेक हैं। परंतु शिष्य के मन को अपहरण करने वाले गुरु दुर्लभ होते हैं॥

 Meaning - 

          There are many teachers who loot money from disciples. But it is difficult to get a teacher who can loot the mind of the disciple/student.

No comments:

Post a Comment

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

Shloka: मूढ़ जहीहि धनागम तृष्णां, कुरु सद्बुद्धिं मनसि वितृष्णाम्। यल्लभसे निजकर्मोपात्तं, वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ।। अर्थात्: हे मुर्ख! ध...