Sunday, May 5, 2024

सुभाषितम् (NOBLE THOUGHTS)



अपृष्टोऽपि हितं व्रूयात् यस्य नेच्छेत् पराभवम्।

एष एव सतां धर्मो विपरीत मतोऽन्यथा॥

अर्थात् -

        जिसका पराजय नहीं चाहते होंगे वो न पुछने पर भी उसको हितकर(अच्छा) परामर्श देना सज्जनों का कर्तव्य है। असज्जन इसका विपरीत आचरण करते हैं॥

Meaning - 

            If you don't want failure or defeat of  anyone, without asking of that person advising beneficially is the righteousness or duty of learned persons. But dishonorable persons behave oppositely.

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