Friday, October 4, 2024

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 


अन्यायोपार्जितं वित्तं दशवर्षाणि तिष्ठति।

प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति॥

अर्थात्  -

                अन्याय से उपार्जित धन दश साल रहता है। परन्तु ग्यारह साल होते ही वह सम्पूर्णरूप से नष्ट हो जाता है।

Meaning  - 

                Wealth earned in a wrong way lasts for ten years. But it vanishes by the time eleventh year comes.

No comments:

Post a Comment

सुभाषितम्( THOUGHT OF THE DAY)

दुर्लभान्यपि कार्याणि सिध्यन्ति प्रोद्यमेन ही।  शिलापि तनुतां याति प्रपातेनार्णसो मुहुः।।  अर्थात्,    कठिन से कठिनतर कार्य भी उद्यम/प्रयास ...