Tuesday, November 25, 2025

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 उत्साहसम्पन्नमदीर्घसूत्रं

                                             क्रियाविधिज्ञं व्यसनेष्वसक्तम्।

शूरं कृतज्ञं दृढ़सौहृदं च लक्ष्मीः
                                    स्वयं याति निवासहेतोः‍‌‌।।

अर्थात् :
    जो उत्साही, आलस्यरहित, कार्य करने के उपायों को जानने वाले तथा बुरे विषयों में अनासक्त , वीर, कृतज्ञ और सच्ची मित्रता वाले हैं, ऐसे मनुष्य के घर स्थिर रहने के लिए लक्ष्मी स्वयं ‌ही जाती हैं।

Meaning -

         One who is enthusiastic, active or diligent , known to the method or solution of deed or action , uninterested to bad things , brave, grateful or thankful and indeed friends - Goddess Lakshmi automatically goes to those persons house to be stable.

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सुभाषितम्( THOUGHT OF THE DAY)

दुर्लभान्यपि कार्याणि सिध्यन्ति प्रोद्यमेन ही।  शिलापि तनुतां याति प्रपातेनार्णसो मुहुः।।  अर्थात्,    कठिन से कठिनतर कार्य भी उद्यम/प्रयास ...