Monday, December 8, 2025

सुभाषितम् (THOUGHT OF THE DAY)

 



सुमहान्त्यपि शास्त्राणि धारयन्तो बहुश्रुताः।

छेतारः संशयानाञ्च क्लिश्यन्ते लोभमोहिताः।।


अर्थात्, 

 

            अनेक शास्त्रों को पढ़ने तथा सुननेवाले और दूसरे के सन्देहों को दूर करनेवाले विद्वान् भी लोभवश नष्टज्ञान होकर  दुःखी होते हैं।

No comments:

Post a Comment

सुभाषितम्( THOUGHT OF THE DAY)

दुर्लभान्यपि कार्याणि सिध्यन्ति प्रोद्यमेन ही।  शिलापि तनुतां याति प्रपातेनार्णसो मुहुः।।  अर्थात्,    कठिन से कठिनतर कार्य भी उद्यम/प्रयास ...