Thursday, September 5, 2024

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 


अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानांजनशलाकया।

चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मैश्रीगुरवे नमः॥

अर्थात्,  -

        उन् गुरु को प्रणाम, जो अज्ञानरूपी अन्धकार से  अंध जनों के आँखों को ज्ञानरूपी अंजन लगाने की सलाई द्वारा खोल देते हैं।

Meaning -

         Salute to those preceptors who awaken/reveal the eyes of blind people from darkness of ignorance through knowledge alike the stick used for the application of collyrium. 

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