Sunday, November 23, 2025

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

 

परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।

वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्।।


  परोक्ष में काम बिगाड़ने वाले और सामने प्रिय बोलने वाले मित्र को मुखपर  दूधवाले विष(जहर) से भरे घड़े के समान छोड़ देना चाहिए।


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