Sunday, March 22, 2026

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 उद्योगे नास्ति दारिद्र्यं जपतो नास्ति पातकम्। 

मौनिनः कलहो नास्ति न भयं चास्ति जाग्रतः ।।

अर्थात्, 

        उद्योगी /परिश्रमी का दारिद्र्य नहीं रहता है। जप करने से पाप दूर होता है। शान्त व्यक्ति का किसी के साथ झगड़ा नहीं होता है। सर्वदा सतर्क रहने वाले व्यक्ति को कभी भय नहीं रहता है। 

Meaning -

 The rich never face poverty. Recitation of prayer or mantras keep sins away. People who choose peace do not get into fights. And those who always stay prepared never get scared .

No comments:

Post a Comment

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 न च शत्रुरवज्ञेयो दुर्बलोऽपि बलीयसा। अल्पोऽपि हि दहत्यग्निर्विषमल्पं हिनस्ति च।। अर्थात्,   बलवान को दुर्बल शत्रु का भी उपेक्षा नहीं करनी च...