Sunday, August 9, 2026

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

 अल्पज्ञ एव पुरुषः प्रलपत्यजस्रं

पाण्डित्यसम्भृतमतिस्तु मितप्रभाषी। 

कांस्यं यथा ही कुरुते अतितरां निनादं

तद्वत् सुवर्णमिह नैव करोति नादम्।।

अर्थात् --

     अल्प ज्ञानयुक्त पुरुष निरन्तर बोलता है परन्तु निश्चित बुद्धि वाला व्यक्ति अल्पभाषी होता है। जैसे कांसे का वर्तन अत्यधिक आवाज करता है , उसी प्रकार यहाँ स्वर्ण शब्द नहीं करता है। 



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