Sunday, May 2, 2021

NCERT, SANSKRIT SHEMUSHI CLASS-9 CHAPTER-1 BHARATI VASANTA GEETIH


निनादय नवीनामये वाणि! वीणाम्
मृदुं गाय गीतिं ललित-नीति-लीनाम् ।
मधुर-मञ्जरी-पिञ्जरी-भूत-मालाः
वसन्ते लसन्तीह सरस रसालाः
कलापाः ललित-कोकिला-काकलीनाम् ॥१ ॥
निनादय….॥ 
अनुवाद -

हे वाणी! नवीन वीणा को बजाओ एवं सुन्दर नीतिओं से परिपूर्ण गीत का मधुर गान करो। इन वसन्त ऋतु में मधुर आम्रपुष्पों से हुए पीलेवर्णयुुक्त सरस आम्रवृक्षों कि पंक्तियाँ सुशोभित हो रही हैं। मनोहर ध्वनियुक्त कोकिलों के समूह सुन्दर लग रहे हैं। हे वाणी! नूतन वीणा को बजाओ।

वहति मन्दमन्दं सनीरे समीरे
कलिन्दात्मजायास्सवानीरतीरे,
नतांपङ्क्तिमालोक्य मधुमाधवीनाम ॥२॥

निनादय….. ॥
हिन्दी अनुवाद

यमुना नदी के तट वेतसलताओं से युक्त है। नदीतट का वायु जलविन्दुओं से पूर्ण होने के कारण मन्दमन्द बह रहा है। इसिलिए झुकी हुई मधुर मालतीलताओं को देखकर, हे वाणी! नवीन वीणा बजाओ ।

ललित-पल्लवे पादपे पुष्पपुञ्जे
मलयमारुतोच्चुम्बिते मञ्जुकुञ्जे,
स्वनन्तीन्ततीम्प्रेक्ष मलिनामलीनाम्॥३॥
निनादय….॥

हिन्दी अनुवाद
मलयपवन से स्पृष्ट सुन्दर पत्तोंवाले वृक्षों, पुष्पसमूहों तथा शोभन लताओं पर काले भौंरों की गुञ्जार करती हुई पंक्ति को देखकर, हे वाणी! नवीन वीणा को बजाओ।

लतानां नितान्तं सुमं शान्तिशीलम्
चलेदुच्छलेत्कान्तसलिलं सलीलम्,
तवाकर्ण्य वीणामदीनां नदीनाम ॥४॥
निनादय….॥

हिन्दी अनुवाद

तुम्हारी ओजस्विनी वीणा को सुनकर लताओं के अतीव शान्ती से युक्त पुष्प हिल उठे, नदीओं का मनोहर जल क्रीड़ा करता हुआ उछल पड़े । हे वाणी ! नवीन वीणा को बजाओ I

                      अभ्यासः

१ अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत ।
क) कविः वीणापाणिं किं कथयति ?
उत्तरम्- कविः वीणापाणिं वाणी इति कथयति ।
ख) वसन्ते किं भवति ?                                                                                                                               उत्तरम् -  वसन्ते मधुरआम्रपुष्पैः पीतवर्णयुक्ताः सरसाः आम्रमालाः सुशोभन्ते । अपि च मनोहरध्वनियुक्ताः कोकिलसमूहाः विलसन्ति ।                                                                                                                             ग) सरस्वत्याः वीणां श्रुत्वा किं परिवर्तनं भवतु इति कवेः इच्छां लिखत ।                                                              उत्तरम् -   सरस्वत्याः ओजस्विनीं वीणां श्रुत्वा यत परिवर्तनं भवतु इति कवेः इच्छा अस्ति तत भवति, -       लतानां अतीव शान्तसुमनम चलेत ; तथा च नदीनां मनोहरजलं सक्रीड़म उच्छलेत ।                                       घ) कविः भगवतीं भारतीं कस्याः नद्याः तटे मधुमाधवीनां नतां पङ्क्तिम अवलोक्य वीणां वादयितुम कथयति ?उत्तरम्- कविः भगवतीं भारतीं यमुनायाः तटेे मधुमाधवीनां नतां पङ्क्तिमवलोक्य वीणां वादयितुम कथयति ।

२. (क) स्तम्भे पदानि, (ख) स्तम्भे तेषां पर्यायपदानि दत्तानि । तानि चित्वा पदानां समक्षे लिखत-

             (क) स्तम्भः                         (ख) स्तम्भः
          क) सरस्वती                         १) तीरे
          ख) आम्रम                            २) अलीनाम्
          ग) पवनः                             ३)समीरः
          घ) तटे                                ४) वाणी
          ङ) भ्रमराणाम                       ५) रसालः
   उत्तरम्- ४)वाणी, ५)रसालः, ३)समीरः, १)तीरे, २)अलीनाम्


४) प्रथमश्लोकस्य आशयं हिन्दीभाषया आङ्ग्लभाषया वा लिखत -
उत्तरम - हे वाणी ? नवीन वीणा को बजाओ तथा सुन्दर नीतिओं से परिपूर्ण गीत का मधुर गान करो । वसन्त ऋतु में मधुर आम्रपुष्प से पीली हो गई रसयुक्त आम के वृक्षों की पङ्क्तियां सुशोभित हो रही हैं । मनोहर ध्वनियुक्त कोयलों के समूह सुन्दर लग रहे हैं । हे वाणी ! नूतन वीणा को बजाओ ।

५) अधोलिखितपदानां विलोमपदानि लिखत -
क) कठोरम् - मृदुं
ख) कटु - मधुरम्
ग) शीघ्रम् - मन्दमन्दम्
घ) प्राचीनम् - नवीनम्
ङ) नीरसः - सरसः

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