Wednesday, July 29, 2026

सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

दीर्घप्रयासेन कृतं हि वस्तु निमेषमात्रेण भजेद् विनाशम्।
कर्तुं कुलालस्य तु वर्षमेकं भेत्तुं हि दण्डस्य मुहूर्तमात्रम्।।

अर्थात् -
     बहुत प्रयास से निर्मित वस्तु क्षण मात्र से विनाश को प्राप्त होता है। कुम्हार का (मटका) बनाने के लिए एक साल, (उसको) तोड़ने के लिए दण्ड का मुहूर्त मात्र ही होता है। 
Meaning --
      A thing made after long endeavor gets vanish for just a moment. Just like one year of a potter for making pot is only one moment to destroy it. 

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सुभाषितम्(THOUGHT OF THE DAY)

दीर्घप्रयासेन कृतं हि वस्तु निमेषमात्रेण भजेद् विनाशम्। कर्तुं कुलालस्य तु वर्षमेकं भेत्तुं हि दण्डस्य मुहूर्तमात्रम्।। अर्थात् -      बहुत ...