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Wednesday, January 28, 2026
NCERT SANSKRIT BHASWATI CLASS - 11 CHAPTER-4 VEERAH SARVADAMANAH
Tuesday, January 27, 2026
सुभाषितम्(Noble Thoughts)
मयूखैर्जगतःस्नेहं ग्रीष्मे पेपीयते रविः।
स्वादु शीतं द्रवं स्निग्धमन्नपानं तदा हितम्।।
ग्रीष्म ऋतु में सूर्य अपनी किरणों द्वारा संसार का सार खींचता रहता है। इसलिए इस समय मीठा, ठंडा द्रव पदार्थ, चिकने खानपान हितकारी है।
Saturday, January 10, 2026
सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)
वसन्ते निचितः श्लेष्मा दिनकृद्भाभिरीरितः।
कायाग्निं बाधते रोगांस्ततः प्रकुरुते बहून्।।
तस्माद्वसन्ते कर्माणि वमनादीनि कारयेत्।
गुर्वम्लस्निग्धमधुरं दिवास्वप्नं च वर्जयेत्।।
अर्थात् --
वसन्त काल में सञ्चित हुआ कफ सूर्य की किरणों से पिघल कर अर्थात् द्रव वन कर शरीर की अग्नि को कम् करके कफजन्य बहुत से रोगों को उत्पन्न करता है।
इसलिए कफ को निकालने के लिए वसन्त ऋतु में वमन, शिरोविरेचन क्रियाएँ करनी चाहिए। गुरु, अम्ल, स्निग्ध, मधुर वस्तुओंका सेवन और दिन में सोना त्याग करना चाहिए।
Sunday, December 28, 2025
सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)
मातृपितृकृताभ्यासो गुणितामेति बालकः।
न गर्भच्युतिमात्रेण पुत्रो भवति पण्डितः।।
अर्थात्,
माता-पिता के अभ्यास कराने पर ही बालक विद्वान् होता है। गर्भ से निकलते ही पुत्र विद्वान् नहीं हो जाता है।
Meaning --
The child becomes intelligent because of proper guidance given by the parents. The child is never intelligent right after coming out of the womb.
Saturday, December 27, 2025
सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)
संहतिः श्रेयसी पुंसां स्वकुलैरल्फकैरपि।
तुषेणापि परित्यक्ता न प्ररोहन्ति तण्डुलाः।।
अर्थात्,
अपने कुल के छोटे व्यक्तियों का समूह भी कल्याणकारी होता है। जैसे भूसा मात्र से अलग हो जाने पर चावल फिर अंकुरित नहीं होते।
Thursday, December 25, 2025
सुभाषितम्(Noble Thoughts)
गुणेष्वेव हि कर्तव्यः प्रयत्नः पुरुषैः सदा।
गुणयुक्तो दरिद्रोऽपि नेश्वरैरगुणै समः।।
अर्थात्,
व्यक्ति सर्वदा सद्गुणोंको ग्रहण करने में प्रयत्न करना चाहिए। दरिद्र होने पर भी व्यक्ति यदि गुण के अधिकारी है, तो गुणहीन नृपति अथवा धनाढ्य व्यक्ति से भी अधिक सम्मानित होता है।
Meaning --
People should always try to accept virtues. One even being poor if having virtues is mostly respected than virtueless king or richest person.
Wednesday, December 24, 2025
सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)
यस्तु संचरते देशान् यस्तु सेवेत पण्डितान्।
तस्य विस्तारिता बुद्धि स्तैलविन्दुरिवाम्भसि।।
अर्थात्,
जो व्यक्ति अनेक देश भ्रमण करता है और विद्वानों का सेवा करता है उसका बुद्धि पानी में तैलविन्दु सदृश विस्तारित हो जाता है।
Meaning --
The one who travels several countries and serves the intelligents, his intelligence expands just like the oil drop spreads in the water.
सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)
उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्। मौनिनः कलहो नास्ति न भयं चास्ति जाग्रतः ।। अर्थात्, उद्योगी /परिश्रमी का दारिद्रय नह...
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1. मुखम् - Face 2. कपालः - Skull 3. चिकूरः - Hair 4. कर्कराला - A curl of hair, ringlet 5. अलिकं - Forehead 6. कर्ण...
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यथैकेन न हस्तेन तालिका संप्रपद्यते। तथोद्यमपरित्यक्तं कर्म नोत्पादयेत् फलम्।। अर्थात् - जैसे एक हाथ से तालि नहीं बजती है ...
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हिन्दी अनुवाद - १) चरित्र का रक्षण यत्नपूर्वक करना चाहिए, धन तो आता और जाता है। क्योंकि धन से सम्पन्न होने वाला व्यक्ति यदि सदाचार से सम्पन्...