Saturday, December 27, 2025

सुभाषितम्(NOBLE THOUGHTS)

 संहतिः श्रेयसी पुंसां स्वकुलैरल्फकैरपि।

तुषेणापि परित्यक्ता न प्ररोहन्ति तण्डुलाः।।

अर्थात्,

    अपने कुल के छोटे व्यक्तियों का समूह भी कल्याणकारी  होता है। जैसे भूसा मात्र से अलग हो जाने पर चावल फिर अंकुरित नहीं होते।

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