संहतिः श्रेयसी पुंसां स्वकुलैरल्फकैरपि।
तुषेणापि परित्यक्ता न प्ररोहन्ति तण्डुलाः।।
अर्थात्,
अपने कुल के छोटे व्यक्तियों का समूह भी कल्याणकारी होता है। जैसे भूसा मात्र से अलग हो जाने पर चावल फिर अंकुरित नहीं होते।
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उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्। मौनिनः कलहो नास्ति न भयं चास्ति जाग्रतः ।। अर्थात्, उद्योगी /परिश्रमी का दारिद्रय नह...
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