सुमहान्त्यपि शास्त्राणि धारयन्तो बहुश्रुताः।
छेतारः संशयानाञ्च क्लिश्यन्ते लोभमोहिताः।।
अर्थात्,
अनेक शास्त्रों को पढ़ने तथा सुननेवाले और दूसरे के सन्देहों को दूर करनेवाले विद्वान् भी लोभवश नष्टज्ञान होकर दुःखी होते हैं।
Hindi translation of Sanskrit textbooks available for Grades 9, 10, 11, and 12. Hub for jokes, essays, and miscellaneous articles written in Sanskrit.
उत्साहसम्पन्नमदीर्घसूत्रं क्रियाविधिज्ञं विषयेष्वसक्तम्। शूरं कृतज्ञं दृढसौहृदं च लक्ष्मीः स्वयं याति निवासहेतोः।। अर्थात्, उत्साही...
No comments:
Post a Comment